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शिव
गोप्रेक्षेश्वर महादेव — काशी का परम पावन अर्धनारीश्वर मोक्षलिंग। सतयुगीन शिवलिंग जहाँ शिव और शक्ति एकाकार रूप में विराजते हैं। दर्शन मात्र से मिले क्लेश मुक्ति, गौ-हत्या पाप नाश और अनंत गौ-दान फल। यह काशी के 42 मोक्षलिंगों में से एक है।
सतयुग में गौ-माताएँ गौ-लोक से काशी आईं। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने अर्धनारीश्वर स्वरूप में दर्शन दिए — आधा भाग आदिशक्ति माता पार्वती का (साकार ब्रह्म) और आधा भाग स्वयं महादेव का (निराकार ब्रह्म)। यह अर्धनारीश्वर स्वरूप ही मोक्षलिंग कहलाया। महादेव ने वचन दिया कि गायों की रक्षा के लिए वे सदैव यहाँ निवास करेंगे और उन पर अपनी दृष्टि (प्रेक्षण) बनाए रखेंगे — इसीलिए गोप्रेक्षेश्वर नाम से विख्यात हुए। द्वापर में स्वयं भगवान कृष्ण ने गौ-हत्या पाप से मुक्ति हेतु यहाँ दर्शन किए।
ॐ नमः शिवाय
प्रातः 4:30 - मंगला पूजा, दोपहर 12:30 - राजभोग, सायं - श्रृंगार, रात 8:00 - महा आरती
सोमवार, प्रदोष, मास शिवरात्रि, सावन मास, महाशिवरात्रि
गोप्रेक्षेश्वर के दर्शन से अनंत गौ-दान का पुण्य, गौ-हत्या पाप से मुक्ति, दाम्पत्य क्लेश नाश, और मोक्ष की प्राप्ति होती है।